"महाराष्ट्र उच्च न्यायालय" नामकरण संबंधी निर्णय जल्द लेने के लिए पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी ने कानून मंत्री को लिखा पत्र
"महाराष्ट्र उच्च न्यायालय" नामकरण संबंधी निर्णय जल्द लेने के लिए पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी ने कानून मंत्री को लिखा पत्र
* विशेष संवाददाता
बॉम्बे उच्च न्यायालय का नाम बदलकर ‘महाराष्ट्र उच्च न्यायालय’ किए जाने को लेकर एक बार फिर उत्तर मुम्बई के पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी ने कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने दिनांक 08-10-2024, 03-02-2025, 29-11-2025 को भेजे हुए पत्रों का हवाला देते हुए लिखा है कि विगत अनेक वर्षों से ‘बॉम्बे उच्च न्यायालय’ का नाम परिवर्तित कर ‘महाराष्ट्र उच्च न्यायालय’ किए जाने हेतु मैं निरंतर प्रयासरत रहा हूँ। इस संदर्भ में मैंने पूर्व में विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य मंत्रियों को अनेक पत्र लिखे हैं। इस विषय पर महाराष्ट्र के माननीय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी द्वारा दिनांक 26-12-2025 को मुझे प्रेषित पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि माननीय उच्च न्यायालय के पूर्णपीठ के अभिमत के अनुसार उच्च न्यायालय के नामकरण अथवा नामांतरण का अधिकार भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की केंद्रीय सूची की प्रविष्टि क्रमांक 78 के अंतर्गत केवल संसद को ही प्राप्त है। साथ ही यह भी अवगत कराया गया है कि वर्ष 2005 से ‘बॉम्बे उच्च न्यायालय’ के नामांतरण संबंधी प्रस्ताव केंद्र सरकार के समक्ष प्रलंबित है तथा इस विषय में संसद में पृथक अधिनियम लाए जाने की आवश्यकता है। पत्र में विभिन्न टिप्पणीयों के साथ जनसेवक गोपाल शेट्टी ने अपनी बात आगे रखी है।
1.भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्च न्यायालय किसी एक शहर का नहीं, बल्कि संपूर्ण राज्य का सर्वोच्च न्यायिक संस्थान होता है। बॉम्बे उच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार केवल मुंबई शहर तक सीमित न होकर महाराष्ट्र के समस्त जिलों तथा राज्य के नागरिकों तक विस्तारित है। अतः राज्यव्यापी अधिकार क्षेत्र वाली सर्वोच्च न्यायिक संस्था का नाम राज्य की पहचान से जुड़ा होना अधिक न्यायसंगत एवं तार्किक है।
2.अन्य राज्यों के उच्च न्यायालयों के नामों से सामंजस्य : भारत के अधिकांश उच्च न्यायालय अपने-अपने राज्यों के नाम से जाने जाते हैं, जैसे— दिल्ली उच्च न्यायालय, गुजरात उच्च न्यायालय, कर्नाटक, राजस्थान, मध्यप्रदेश, केरळ, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, सिक्कीम, छत्तीसगड, झारखंड, त्रिपुरा, मणिपूर, मेघालय, तेलंगाणा उच्च न्यायालय अस्तित्व में हैं
अतः महाराष्ट्र राज्य के लिए भी “महाराष्ट्र उच्च न्यायालय” नाम सर्वथा उपयुक्त एवं तार्किक होगा।
3.‘महाराष्ट्र’ एक ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, मराठी भाषा एवं सांस्कृतिक अस्मिता का सम्मान करने वाला राज्य है, जिसकी स्थापना जनआंदोलन और भाषायी अस्मिता के आधार पर हुई थी। ऐसे राज्य की सर्वोच्च न्यायिक संस्था का नाम किसी औपनिवेशिक ब्रिटिश कालीन पहचान से जुड़ा रहना, वर्तमान लोकतांत्रिक एवं स्वदेशी भारत की भावना के अनुरूप नहीं है। ‘महाराष्ट्र उच्च न्यायालय’ नाम औपनिवेशिक विरासत से मुक्त होकर आधुनिक भारत की आत्मनिर्भर एवं स्वाभिमानी सोच को प्रतिबिंबित करेगा। उच्च न्यायालय का नाम “महाराष्ट्र उच्च न्यायालय” किए जाने से राज्य की भाषा, संस्कृति और अस्मिता को यथोचित सम्मान प्राप्त होगा।
4. जनभावना एवं जनप्रतिनिधियों की दीर्घकालीन मांग : महाराष्ट्र राज्य के नागरिकों, सामाजिक संगठनों, विधिज्ञों एवं निर्वाचित जनप्रतिनिधियों द्वारा लंबे समय से इस नाम परिवर्तन की मांग की जा रही है। महाराष्ट्र की जनता, सामाजिक संगठनों, विधिज्ञों एवं जनप्रतिनिधियों में इस विषय को लेकर व्यापक सहमति एवं सकारात्मक भावना है। यदि संसद के माध्यम से इस नामांतरण को स्वीकृति प्रदान की जाती है, तो यह निर्णय देशभर में यह संदेश देगा कि केंद्र सरकार राज्यों की संवैधानिक पहचान और जनभावनाओं के प्रति संवेदनशील एवं उत्तरदायी है।
पत्र में आगे जनसेवक शेट्टी ने उल्लेख किया है कि आपके तथा माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा प्रदान किया गया, जो महाराष्ट्र की जनता के लिए गर्व का विषय है और जिसका सकारात्मक प्रभाव हाल ही में संपन्न चुनावों में भी स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है । उसी प्रकार, यदि ‘बॉम्बे उच्च न्यायालय’ का नामकरण ‘महाराष्ट्र उच्च न्यायालय’ किए जाने की अंतिम स्वीकृति संसद के माध्यम से प्रदान की जाती है, तो यह निर्णय महाराष्ट्र के नागरिकों के आत्मगौरव को सुदृढ़ करेगा तथा मराठी भाषा एवं राज्य की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सम्मान दिलाएगा। अतः अनुरोध है कि इन सभी ऐतिहासिक, संवैधानिक, प्रशासनिक एवं जनभावनात्मक पहलुओं को दृष्टिगत रखते हुए, केंद्र सरकार के स्तर पर आवश्यक विधि प्रक्रिया प्रारंभ कर संसद में संबंधित अधिनियम प्रस्तुत किया जाए, जिससे ‘बॉम्बे उच्च न्यायालय’ को आधिकारिक रूप से ‘महाराष्ट्र उच्च न्यायालय’ नाम प्रदान किया जाए।
