"ओसी" को लेकर पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल की म्युनिसिपल कमिश्नर संग बैठक हुई...
"ओसी" को लेकर पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल की म्युनिसिपल कमिश्नर संग बैठक हुई...
* संवाददाता
मुम्बई : उत्तर मुंबई के पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी के नेतृत्व में गए एक प्रतिनिधिमंडल की बृहन्मुंबई महानगरपालिका आयुक्त भूषण गगराणी के कार्यालय में उनसे मुंबई शहर के बहुचर्चित और लंबे समय से लंबित ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट (OC) के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में महाराष्ट्र शासन के वर्तमान शासन निर्णय में प्रक्रियात्मक त्रुटियों को दूर करने पर चर्चा हुई। वर्तमान शासन निर्णय में OC छूट केवल ८०० वर्ग फुट वाले अपार्टमेंट्स तक ही सीमित थी, जिसे रद्द करने और मंजूर नक्शा वाले सभी निवासी इमारतों और अपार्टमेंट्स को क्षेत्रफल की कोई सीमा न लगाते हुए "ऑक्युपेशन टू ऑल" के सिद्धांत के अनुसार (OC) देने की ठोस और एकमुखी मांग भारतीय जनता पार्टी की ओर से की गई।
इसके अलावा, वर्तमान शासन निर्णय में केवल स्कूलों और अस्पतालों के लिए व्यावसायिक (कमर्शियल) इमारतों को ही OC देने की प्रावधान था। इस बैठक में यह सीमा हटाकर सभी प्रकार की व्यावसायिक इमारतों को भी ओसी देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया।
इसके लिए अगले दो दिनों में महानगरपालिका आवश्यक मसौदा तैयार कर राज्य शासन को प्रस्तुत करेगी और इस सप्ताह में शासन की मंजूरी प्राप्त करने के सुझाव बैठक में उपस्थित जनसेवक गोपाल शेट्टी, भाजपा महापालिका गटनेता गणेश खणकर, जिल्हाध्यक्ष बाला तावडे, एडवोकेट सिद्धार्थ शर्मा, आर्किटेक्ट अरविंद नंदापुरकर और एडवोकेट विवेकानंद गुप्ता द्वारा दिए गए।

इस बैठक में एक और अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा चर्चा में लिया गया। बृहन्मुंबई महानगरपालिका के अस्तित्व में आने के बाद १९६२ तक अस्तित्व में आई इमारतों को 'टॉलेरेटेड कैटेगरी' में शामिल किया गया था। उस समय पालिका की अपेक्षा थी कि इसके बाद होने वाली सभी इमारतें पालिका की पूर्व अनुमति लेकर ही बनाई जाएंगी। हालांकि, मुंबई शहर के तेजी से विस्तार, बढ़ती जनसंख्या और तीव्र आवास की आवश्यकता के कारण नागरिकों ने उपलब्ध जगहों पर घर बनाए और झोपड़पट्टियों का बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ। इस पृष्ठभूमि में शासन ने झोपड़पट्टीधारकों को संरक्षण देने के लिए स्लम कानून लागू किया है और १९७६, १९८५, १९९५, २००० और अंत में २०११ तक की झोपड़ियों को संरक्षण दिया गया है।
महानगरपालिका ने १९६२ की डेटम लाइन कभी आगे नहीं बढ़ाई। परिणामस्वरूप, छोटी-मोटी मरम्मत या पुनर्निर्माण के समय शिकायत होने पर नोटिस, निष्कासन की कार्रवाई, न्यायालयीन मामले आदि के कारण नागरिकों को बड़े पैमाने पर परेशानी उठानी पड़ रही है।
इसलिए, इस डेटम लाइन को कम से कम २००० तक बढ़ाने की ठोस मांग इस बैठक में की गई। वास्तव में २००० तक की झोपड़ियों को वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना तोड़ा नहीं जा सकता है, ऐसा कानून भी अस्तित्व में है, इसलिए इस मांग को न्यायोचित आधार है।
महानगरपालिका आयुक्त ने भी सैद्धान्तिक रूप में इस बात को सही माना। जनसेवक गोपाल शेट्टी और उपस्थित अन्य लोगों ने इस मुद्दे को तत्काल नगर विकास विभाग को भेजने की जोरदार मांग की है और इसके जल्द ही समाधान होने की पूरी संभावना है।
इन दो ऐतिहासिक निर्णयों से मुंबई शहर के लाखों नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी और महानगरपालिका के प्रशासनिक कार्यों में अनावश्यक समय और खर्च में महत्वपूर्ण बचत होगी।
इस बैठक में पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी, भाजपा गटनेता गणेश खणकर, जिलाध्यक्ष बाळा तावडे, एड. सिद्धार्थ शर्मा, आर्किटेक्ट अरविंद नंदापुरकर और एडवोकेट विवेकानंद गुप्ता उपस्थित थे।
