सुरेश मिश्र की कलम से विशेष "कजरी"
मानसून नहीं आया मगर कजरी आ गई !
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सुरेश मिश्र की कलम से विशेष ...
"कजरी"
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( पत्नी अपने पतिदेव के साथ सभी को जगाने का प्रयास कर रही है। वह बताती है कि कौन सा योगासन करने से कौन सी बीमारी दूर होती है )
हरे रामा योगा से भागइ बिमारी,
जागा हो नर-नारी रे हरी।
जेकरा देखा बीपी बाढ़इ,
फालिश गिरइ बेबंदइ रामा,
हरे रामा, अनुलोम-विलोम करा री,
जागा हो नर-नारी रे हरी।
गोमुख आसन अरु ताड़ासन,
रोकइं हार्ट अटैकवा रामा,
हरे रामा, भुजंगासन सब संभारी,
जागा हो नर-नारी रे हरी।
मंडूक आसन अरु वक्रासन,
रोकइं बढ़ल शुगरवा रामा,
हरे रामा, किडनी क हरि लें बिमारी,
जागा हो नर-नारी रे हरी।
त्रिकोण आसन, वीरभद्रासन,
कम कइ देइं वजनवा रामा,
हरे बाबा सूर्य-नमस्कार करा री,
करइं ना नर-नारी रे हरी।
कमरदर्द पद्मासन हरि ले,
बुद्धि -विवेक बढ़ावइ रामा,
हरे रामा काहें भोगत हो बिमारी,
जागा हो नर-नारी रे हरी।
सेतुबंधासन अरु शीर्षासन,
हरइं मूड़ के पिरिवा रामा,
हरे रामा शव आसन बा दुधारी,
जागा हो नर-नारी रे हरी।
नौकासन से मांसपेशियन,
में बाढ़इ मजबुतिया रामा,
हरे रामा भागइ थाइराइड बिमारी,
जागा हो नर-नारी रे हरी।
भद्रासन, धनुरासन कइके,
पद्मासन करा हर दिन रामा,
हरे पिया,रतिया में गइब्या लचारी।
जागा हो नर-नारी रे हरी।
हरे रामा योगा से भागइ बिमारी,
करा हो नर-नारी रे हरी।
* कवि : सुरेश मिश्र
( मुंबई )