राजनीति के लिए भाषा को हथियार बनाना दुर्भाग्यपूर्ण – डॉ. योगेश दुबे

राजनीति के लिए भाषा को हथियार बनाना दुर्भाग्यपूर्ण – डॉ. योगेश दुबे

राजनीति के लिए भाषा को हथियार बनाना दुर्भाग्यपूर्ण – डॉ. योगेश दुबे

* संवाददाता

   मुंबई : हिंदी और मराठी भाषाएँ, भले ही उनमें कुछ अंतर हों, लेकिन उनकी मूल संरचना, लिपि और शब्दावली में कई समानताएँ हैं, जो उन्हें एक ही भाषा परिवार से संबंधित दर्शाती हैं। दोनों भाषाओं में समान रूप से अनेक शब्द बोले जाते हैं। एक भाषा का जानकार दूसरी भाषा को आसानी से समझ और बोल सकता है। उत्तर भारतीय महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता डॉ योगेश दुबे ने कुछ स्थान पर उत्तर भारतीयों के साथ भाषा के नाम पर की गई मारपीट की घटनाओं की कड़ी आलोचना करते हुए उपरोक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि आज मुंबई में ज्यादातर तीसरी या चौथी पीढ़ी के उत्तर भारतीय रह रहे हैं, जो पूरी तरह से महाराष्ट्र की संस्कृति और भाषा को अपना चुके हैं। ऐसे में सिर्फ राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए भाषा को हथियार बनाया जा रहा है, जो पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि आज का उत्तर भारतीय खुद को महाराष्ट्र की गौरवशाली संस्कृति से जुड़ा मानता है। तो रोजी-रोटी की तलाश में मुंबई आए लोग अब पूरी तरह से यहां का हो गए हैं। महाराष्ट्र के विकास में वे पूरा योगदान दे रहे हैं। कुछ लोग भाषा का मुद्दा खड़ा कर शांतिपूर्ण वातावरण को खराब करना चाहते हैं, परंतु ऐसे लोगों को मालूम होना चाहिए कि महाराष्ट्र के लोगों ने हमेशा राष्ट्रीय सोच के अनुरूप काम किया है। डॉ योगेश दुबे ने कहा कि पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। यह एक प्रकार से महाराष्ट्र का सौहार्द और आपसी भाईचारे को बिगाड़ने का असफल प्रयास है। महाराष्ट्र में रहने वाला हर उत्तर भारतीय मराठी भाषा का सम्मान करता है और अधिक से अधिक लोग अपने दैनिक जीवन में  मराठी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। उत्तर भारतीय महाराष्ट्र दिवस को पूरे हर्ष और उल्लास के साथ मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि मारपीट की घटनाओं को हमने संज्ञान में लिया है । इसके लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया की मदद ले रहे हैं। डॉ योगेश दुबे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राज्यपाल डॉ सीपी राधाकृष्णन से उत्तर भारतीयों की सुरक्षा की मांग की है।