विशेष लेख ... "योगी भारत-निरोगी भारत मिशन "

विशेष लेख ... "योगी भारत-निरोगी भारत मिशन "
भारत भूषण भारतेंदु

विशेष लेख ... "योगी भारत-निरोगी भारत मिशन ..."

* भारत भूषण 'भारतेन्दु'

  देश के हर हिस्से में आज एक होड़ दिखाई देती है,अस्पताल खोलने की। बड़े-बड़े भवन, थ्री या फाइव स्टार होटलों जैसा लकदक माहौल, सेलिब्रिटियों की उपस्थिति वाला चमकदार उद्घाटन समारोह , आधुनिक मशीनों का शोर और दवाइयों का बढ़ता हुआ कारोबार। नेता हों, धर्मगुरु हों या आधुनिक शिक्षक... अधिकांश इस दौड़ में शामिल होते जा रहे हैं। लेकिन सवाल उठता है कि जब अस्पतालों की संख्या बढ़ रही है, तो बीमारियाँ क्यों नहीं घट रहीं?
  हकीकत यह है कि हम बीमारी के इलाज में तो आगे बढ़ रहे हैं, मगर बीमारी से बचाव की कला सिखाने में पिछड़ते जा रहे हैं। समाज को इलाज की आदत पड़ चुकी है, स्वास्थ्य की नहीं। यही कारण है कि कैंसर, हार्ट अटैक, डायबिटीज और डिप्रेशन जैसी बीमारियाँ महामारी की तरह फैल रही हैं।
 ब्रह्मर्षि योगीराज श्री भारत भूषण भारतेंदु जी के अनुसार “अस्पताल बढ़ाने से नहीं, स्वस्थ जीवन जीने की कला सीखने से भारत निरोगी बनेगा।” यही सोच लेकर उन्होंने मुहिम चलाई है—“योगी भारत, निरोगी भारत।”
  इस मुहिम का उद्देश्य सरल है पर गहरा भी। हर नागरिक योग, प्राणायाम, ध्यान, सात्विक आहार और प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाए ताकि वह बीमार ही न पड़े। यह दृष्टिकोण केवल दवा या उपचार से नहीं, बल्कि जीवनशैली में बदलाव से संभव है। योगीराज भारत भूषण भारतेंदु जी का मानना है कि स्वास्थ्य अस्पताल की चारदीवारी से बाहर, हर इंसान की दिनचर्या में बसता है। आज की स्थिति चिंताजनक है। स्वास्थ्य सेवाएँ एक बड़े उद्योग का रूप ले चुकी हैं। बीमारियों को मिटाने की बजाय उन्हें “प्रबंधित” करने का कथित कारोबार चल रहा है। पर असली इलाज वही है जो बीमारी को जन्म ही न लेने दे।  क्या हम अस्पतालों की कतारों में लगने के लिए पैदा हुए हैं, या निरोग जीवन जीने के लिए?
  “योगी भारत, निरोगी भारत” सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि जीवनदर्शन है। यह हमें बताता है कि यदि हर नागरिक योग और प्राकृतिक स्वास्थ्य पद्धति को अपनाए तो न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य सुधरेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था भी दवा-निर्भरता से मुक्त होगी।
  आज भारत को अस्पतालों के ठेकेदारों की नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के संरक्षकों की जरूरत है। योगीराज भारत भूषण भारतेंदु जी का भगीरथ प्रयास और गिलहरी जैसी निष्ठा यही दिशा दिखा रही है। यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि इस मुहिम से जुड़ें और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसा भारत गढ़ें जो सच में “योगी” और “निरोगी” हो।