मंदिरों के कोष के उपयोग का निर्णय मंदिरों द्वारा स्वयं किया जाना चाहिए-पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी
मंदिरों के कोष के उपयोग का निर्णय मंदिरों द्वारा स्वयं किया जाना चाहिए-पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी
* संवाददाता
बोरीवली : केंद्र ने माननीय सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण के पक्ष में नहीं है और स्पष्ट किया है कि उसने पहले ही उन संवैधानिक प्रावधानों की अपनी व्याख्या रख दी है जो राज्यों को धार्मिक संस्थानों की धर्मनिरपेक्ष गतिविधियों का प्रबंधन करने में सक्षम बनाते हैं। पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी ने इसका स्वागत करते हुए कहा है कि मैंने पहले ही यानी 9 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को पत्र लिखकर दक्षिण भारत के मंदिरों को कुछ सरकारी अधिकारियों के मनमानेपन से मुक्त कराने और राजनीतिक व्यक्तियों द्वारा राजनीतिक स्वार्थ के चलते मन्दिरों व उसके कोष पर नियंत्रण को लेकर विस्तार से पत्र लिखा था और मांग की थी केंद्र इस पर सूक्ष्मता से निरीक्षण कर योग्य कदम उठाए।
पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी ने कभी अपने राजनीतिक करियर में हिन्दू-मुस्लिम वाद-विवाद शुरू करके राजनीतिक लाभ लेने का कभी प्रयास नहीं किया। पर इसके साथ-साथ सनातन की गरिमा को और अधिक प्रगाढ़ कर आलोकित करने के लिए भी कभी पीछे नहीं रहे। हिंदुत्व की मुख्य धारा के लिए समर्पित पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी ने जब भी सनातनीयों पर शारीरिक , मानसिक या आर्थिक प्रहार होते देखा तो बिना एक पल गवाए वे प्रतिरोध में भी पीछे नहीं रहे हैं। इसी के दृष्टिगत केंद्र से कोई नीति बनवाने तथा योग्य हल निकलवाने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री जी को पत्र लिखकर उन तक अपनी बात पहुँचाई थी। जिसके उपरांत मंदिरों के प्रबंधन, सरकारी हस्तक्षेप और सनातन संस्थाओं की स्वायत्तता पर बहस भी और तेज हो गई थी।
जनसेवक गोपाल शेट्टी के पत्र में स्पष्ट लिखा था कि मंदिरों के कोष के उपयोग का निर्णय मंदिरों द्वारा स्वयं किया जाना चाहिए और यह केवल हिंदू उद्देश्यों के लिए होना चाहिए। हिंदू मंदिरों का प्रबंधन स्वयं हिंदुओं द्वारा किया जाना चाहिए न कि उन राजनेताओं द्वारा जो अपने रवैये और आचरण में हिंदू विरोधी हैं और मंदिरों को अपनी वोट बैंक की राजनीति के लिए लूटने निकले हैं। एक बार जब मंदिर , भ्रष्ट अधिकारियों के चंगुल से मुक्त हो जाएं, तो मंदिरों का प्रबंधन उन लोगों द्वारा किया जाना चाहिए जो हिंदू धर्मशास्त्र में पारंगत हों और साथ ही अच्छे प्रशासक भी हों। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि मंदिरों को प्राप्त दान से स्कूल और कॉलेज शुरू करने का निर्देश दिया जाए और उन्हें स्व-वित्तपोषण के आधार पर ट्रस्ट के माध्यम से प्रबंधित करने का भी निर्देश दिया जाए। विशेष रूप से समाज के गरीब वर्ग के लिए मन्दिरों के कोष का उपयोग हो तभी सनातनीयों को इसका फायदा होगा। उन्होंने यह भी सुझाव भी दिया कि रामकृष्ण और चिन्मय मिशन को ऐसे स्कूल और कॉलेज चलाने में विशेषज्ञता है, उनसे इस संबंध में उचित प्रशासनिक कर्मचारी नियुक्त करने का अनुरोध किया जा सकता है जिसका प्रबंधन हिंदू सिद्धांतों पर आधारित हो। उन्होंने सुझाव दिया कि मंदिर स्वयं संस्कृत कॉलेज, वेद पाठशालाएं शुरू करें और हिंदू उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए ऐसी बहुत सी जानकारी और वैज्ञानिक ज्ञान वाली अनुसंधान गतिविधियों, शास्त्रों और पुस्तकों में मदद करें जो वर्तमान में पूरी तरह से अनुपस्थित है।
जनसेवक गोपाल शेट्टी ने अंत मे लिखा कि हिंदू समुदाय अपनेपन और गर्व की भावना के साथ रह सकता है जो अब वंशवादी दलों द्वारा अपनाए गए फर्जी धर्मनिरपेक्षता से पूरी तरह खत्म हो गया है। इसलिए मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है कि सुझाव पर गौर करें और मंदिरों को सरकारी अधिकारियों व राजनीतिक लोगों के चंगुल से मुक्त कराने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
