श्री मुंबई जैन संघ आयोजित भव्य रथयात्रा में उमड़ा भारी जन सैलाब : धर्म, संगठन और नवाचार के अनुपम संगम का हुआ दर्शन

 श्री मुंबई जैन संघ आयोजित भव्य रथयात्रा में उमड़ा भारी जन सैलाब : धर्म, संगठन और नवाचार के अनुपम संगम का हुआ दर्शन

 श्री मुंबई जैन संघ आयोजित भव्य रथयात्रा में उमड़ा भारी जन सैलाब : धर्म, संगठन और नवाचार के अनुपम संगम का हुआ दर्शन

- केबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा और डॉ. मंजू लोढ़ा की विशेष उपस्थिती में भव्य आयोजन

* अमित मिश्रा

  मुम्बई : श्री मुंबई जैन संघ के तत्वावधान में एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व सामूहिक भव्य रथयात्रा का आयोजन किया गया। इस रथयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर इतिहास रच दिया। यह रथयात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि धर्म प्रभावना, सामाजिक एकता और तकनीकी नवाचार का जीवंत उदाहरण बनी।

  रथयात्रा का शुभारंभ कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने परम पूज्य गच्छाधिपति राजशेखरसुरिश्वरजी, रत्नाकरसुरिश्वरजी, नित्यसेनसुरिश्वरजी, चंद्राननसागरजी, कीर्तिरत्नसुरिश्वरजी और हितेशचंद्रसुरिश्वरजी समेत अनेक जैन संतों की उपस्थिति में हरी झंडी दिखाकर किया।

  इस दौरान केबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने कहा कि, "मुंबई के हर इलाके में एक कबूतर खाना होना चाहिए, यह अहिंसा का जीवंत प्रतीक है।"

  इसके साथ ही उन्होंने एक प्रण भी लिया के जब तक हर इलाके में कबूतर खाना नहीं हो जाता है हम सभी जैन किसी एक चीज़ का त्याग करेंगे।

  श्री मुंबई जैन संघ संगठन के पदाधिकारी कमलेश शाह ने कहा कि "ये यह रथयात्रा सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक आंदोलन, एक उद्देश्यपूर्ण परेड और एकता का जीवंत चित्र है।"

  एक अन्य पदाधिकारी नितिन वोरा ने कहा कि "मुंबई के 200 से अधिक जैन संघ, 400 से अधिक पूज्य साधु-साध्वी भगवंत सहित जैन समाज के हजारों लोगों ने इस रथयात्रा से जुड़कर जिनशासन के वैभव,एकता और सेवा का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया है। 

  वही गिरीश शाह ने भी इस यात्रा की प्रशंसा करते हुए कहा कि " रथ यात्रा का मुख्य उद्देश्य है श्रद्धा का संकल्प,  सेवा का समर्पण और भक्ति की आवाज़।

  यात्रा में निकली 15 झांकियों ने लोगों को गहराई से प्रभावित किया। पहली झांकी “संघ में है शक्ति” में विभिन्न जैन संघों के ध्वज एक मंच पर लहराते नजर आए  यह एकता, समर्पण और संगठन शक्ति का प्रतीक रही। दूसरी झांकी “संघठित भारत – धर्ममय राष्ट्र” ने भारत के नक्शे के माध्यम से बताया कि कैसे जैन संस्कृति पूरे देश में सक्रिय और प्रभावी है। तीसरी झांकी “Youth for Dharma” में आधुनिक युवा डिजिटल डिवाइस के साथ नवकार मंत्र का जाप करते हुए दिखे – यह “Tech+Faith” की सोच को दर्शाती रही। चौथी झांकी “Finance + Freedom = धर्म + Enterprise” ने बताया कि आज का युवा आर्थिक स्वावलंबन और पारदर्शिता के साथ धर्म और व्यापार दोनों को साथ लेकर चल सकता है।

इसके बाद की झांकियां – “समाज सुधार”, “साधु-साध्वी सुरक्षा”, “Digital Dharma”, “आर्थिक पारदर्शिता”, “नारी नेतृत्व” और “आध्यात्मिकता – समाधान हर संकट का” – संघ के विविध सामाजिक और आध्यात्मिक पक्षों को उजागर करती रहीं।

“Jain Sangh Vision 2040” नामक LED आधारित झांकी ने भविष्य की योजनाओं, डिजिटल धर्म प्रभावना, जैन शिक्षा और युवा नेतृत्व को अत्याधुनिक अंदाज़ में प्रस्तुत किया।

अंतिम झांकी “संघ की एकता – जिनशासन की भव्यता” में युवा, महिलाएं, वरिष्ठ और सेवाभावी वर्ग एक साथ मंच पर दिखे – सबके हाथों में ध्वज, दीपक और पुष्प थे। यह झांकी “एक साथ, एक धर्म, एक भारत” का भाव लेकर यात्रा का समापन बिंदु बनी।

इस आयोजन की सफलता में वीरेंद्र शाह, घेवरचंद बोहरा, भवरलाल कोठारी, नितिन वोरा, मुकेश जैन, राकेश शाह, आशिष शाह, मितेश भाई, कल्पेश भाई, जयेश भाई, गिरीश भाई समेत युवा टीम का विशेष योगदान रहा।

रथ यात्रा के दौरान धार्मिक भक्ति के साथ-साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, संगीत, लोककला और पारंपरिक वेशभूषा ने माहौल को जीवंत बनाए रखा। श्रद्धालुओं ने रथ की रस्सी खींचकर पुण्य अर्जित किया, वहीं संतों के प्रवचनों ने जनमानस को धर्म और संयम की दिशा में प्रेरित किया।

यह रथयात्रा यह संदेश देकर पूरी हुई कि धर्म केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि समाज निर्माण, युवा प्रेरणा और आधुनिक जीवन में संतुलन का माध्यम बन सकता है।