कविता : कृष्ण क्या है तुम्हारे लिए ?

कविता : कृष्ण क्या है तुम्हारे लिए ?

कविता : कृष्ण क्या है तुम्हारे लिए ?
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कृष्ण क्या है तुम्हारे लिए 'सखी' ?
कृष्ण प्रेम का स्वास है 
कृष्ण अटूट विश्वास है
कृष्ण आस भी 
कृष्ण हर दम पास भी 
भोला है संयम रखता है 
कान्हा की मुरली पर मत जाना !
सुदर्शन चक्र भी रखता है!
कृष्ण दुनिया है मेरी 
कृष्ण सर्दी की धूप सुनहरी 
कृष्ण है तो जीवन है ।
कृष्ण नहीं तो क्या तन-मन है ?
और तुम पूछते हो 
कि कृष्ण क्या है?

कृष्ण क्या है तुम्हारे लिए 'प्रहरी' ?
कृष्ण परम योद्धा है,सुधीर है
कृष्ण साहसी-परमवीर है
 सर्व युद्धकला सम्पन्न 
 कृष्ण कूटनीति-राजनीति का दर्पण 
कृष्ण शंख से चित्कार तक 
कृष्ण विकार से आकार तक 
कृष्ण शांति से हथियार तक 
कृष्ण ना से स्वीकार तक 
कृष्ण प्रहरी है 
कृष्ण विस्मयकारी है
कृष्ण की लीला 
कृष्ण ही जाने 
कृष्ण मेरे गुरू हैं 
कृष्ण को सब माने ।

कृष्ण क्या है तुम्हारे लिए 'मुनि' ?
कृष्ण यथार्थ है 
परमार्थ है 
कृष्ण जीवनकोष है
तृष्णा भी कृष्ण 
कृष्ण ही मोक्ष है
कृष्ण जीवन की अभिलाषा है 
जैसे कोई देखे कृष्ण को 
वैसी कृष्ण की परिभाषा है
शून्य से अनन्त तक 
रचना केवल वो ही जाने 
कृष्ण क्या हैं 
 बस कृष्ण ही जाने।

* रचनाकार - राजेश कुमार लंगेह ( जम्मू )