कविता : चलो  बहन बात करते हैं... 

कविता : चलो  बहन बात करते हैं... 
राजेश कुमार लंगेह

कविता : चलो  बहन बात करते हैं ...
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चलो  बहन बात करते हैं
कुछ शिकायत करो
कुछ गिला करते हैं
चलो  हाथ पकड़कर फिर साथ चलते हैं
चलो बहन बात करते हैं।

बचपन की वो बातें 
नन्हीं सी ख्वाहिशें , 
कुछ बेबुनियाद सी बातें 
कुछ बेवजह की लड़ाईयां 
कुछ अजीब तरह की शर्तें 
खो गए हंसी के वो किस्से
किस्मत ने जो बांट दिए 
हमें सुख-दुःख के हिस्से 
जो आज तक नहीं कहा 
आज ज़िक्र करते हैं 
चलो बहन बात करते हैं।

तुम मेरी चिंता की धुन सुनो
मैं तेरे संघर्ष की कहानी लिखूं
कभी तुम मेरी मुश्किलों में आ जाओ
कभी मैं तेरे सपनों में रंग भर जाऊं
काश कोई ऐसा भी रोज़ आए
तुम मेरे जैसी बन जाओ
मैं तुम्हारे जैसा हो जाऊं
चलो कुछ तुम बोलो
कुछ साथ सुनते हैं 
चलो बहन बात करते हैं।

हम दोनों के एक से नैन-नक्श हैं 
हुबहू हम दोनों एक से अक्स हैं 
थोड़ा जिम्मेवारियों से फ़ुर्सत लेकर
आज फ़ुर्सत से एहसास करते हैं 
बचपन जो बीत गया 
फिर से जी लेते हैं 
चलो बहन बात करते हैं 
चलो बात करते हैं।

* रचनाकार : राजेश कुमार लंगेह  (जम्मू )