रीलॉइड का एक दिवसीय वर्टिकल फिल्ममेकिंग वर्कशॉप : वर्टिकल एंटरटेनमेंट में भारत का सुनहरा भविष्य

रीलॉइड का एक दिवसीय वर्टिकल फिल्ममेकिंग वर्कशॉप : वर्टिकल एंटरटेनमेंट में भारत का सुनहरा भविष्य

रीलॉइड का एक दिवसीय वर्टिकल फिल्ममेकिंग वर्कशॉप : वर्टिकल एंटरटेनमेंट में भारत का सुनहरा भविष्य

* संवाददाता

     मुंबई : रीलॉइड ने सफलतापूर्वक अपने एक दिवसीय वर्टिकल फिल्ममेकिंग वर्कशॉप का आयोजन किया, जिसमें नए फिल्मकार, फिल्म छात्र और इंडस्ट्री के विशेषज्ञ शामिल हुए। इस वर्कशॉप में एक्टिंग, राइटिंग, सिनेमैटोग्राफी और एडिटिंग के ज़रिए वर्टिकल कहानी कहने की कला पर विस्तार से चर्चा हुई।

  रीलॉइड के सीईओ रोहित गुप्ता ने कहा कि, “भारत, चीन के बाद अगली बड़ी एंटरटेनमेंट वेव के लिए तैयार है। एक अरब से ज्यादा मोबाइल दर्शकों के साथ, भारत वर्टिकल रिवॉल्यूशन में लीड कर सकता है।”

  मिर्ज़ापुर वेब सीरीज़ के सह-लेखक विनीत कृष्णा ने बताया कि कैसे उन्होंने ओटीटी से माइक्रोड्रामा राइटिंग तक का सफर तय किया। उन्होंने कहा कि 60–90 सेकंड की वर्टिकल कहानियां लिखना चुनौती भी है और मौका भी।

  सोनी इंडिया के सुनील गवई, संधीव नायर और ईशान सिंह ने लाइव डेमो में दिखाया कि वर्टिकल शूटिंग, लाइटिंग और ऑब्जेक्ट की पोज़िशनिंग मोबाइल स्क्रीन पर कहानी कहने में कितनी अहम है। उन्होंने बताया कि सोनी के मिररलेस कैमरे जैसी प्रोफेशनल तकनीक से छोटे वर्टिकल फिल्मों की क्वालिटी और भी बढ़ सकती है।

  वर्कशॉप में प्रतिभागियों ने खुद भी स्क्रिप्ट लिखकर, एक्टिंग करके, शूटिंग और एडिटिंग कर अपने वर्टिकल माइक्रोड्रामा बनाए।

  श्री गुप्ता ने कहा, “ऐसे वर्कशॉप्स नए कहानीकारों को ताकत देते हैं। हमारे लिए वर्टिकल केवल एक फॉर्मेट नहीं, बल्कि सिनेमा की नई भाषा है। रीलॉइड भारत का अंतरराष्ट्रीय प्लेटफ़ॉर्म है।”

 - रीलॉइड के बारे में...

     रीलॉइड एक नई पीढ़ी का एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म है, जो वर्टिकल माइक्रोड्रामा और क्रिएटिव फॉर्मेट्स पर काम करता है। इसका लक्ष्य नए क्रिएटर्स को बढ़ावा देना और मोबाइल-फर्स्ट दुनिया के लिए सिनेमा को नए रूप में पेश करना है।

  वर्कशॉप का समापन एक खास पैनल डिस्कशन से हुआ, जिसमें फिल्म, लेखन और टेक्नोलॉजी से जुड़े कई बड़े नामों ने वर्टिकल माइक्रोड्रामा के भविष्य पर अपने विचार रखे।