नवरात्रि पर विशेष अवधी रचना "रहिया जोहत बानी न"

नवरात्रि पर विशेष अवधी रचना "रहिया जोहत बानी न"

नवरात्रि पर विशेष अवधी रचना "रहिया जोहत बानी न"

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शेरवा पे चढ़िके फिनि से
 आवा हे महतरिया
रहिया जोहत बानी न।
लखि-लखि थकि गइ मोर नजरिया 
 *रहिया जोहत बानी न।*

भक्तन कइ भिड़िया देखा,
माई चहुंओर हो,
जय अंबे का जयकारा,
पग-पग पे शोर हो,
तोहरे दर आइल बानी,
लइके लाल चुनरिया,
 *रहिया जोहत बानी न।*
जल्दी आवा आजु मयरिया 
 *रहिया जोहत बानी न।*

महिषासुर के वंशजवा,
धोखा दें छलि-छलि के ,
गरबा मा नाचत हउवें,
भेषवा के बदलि-बदलि के 
जब ले *कल्कि* न आवइं,
भांजा आइ कटरिया ,
 *रहिया जोहत बानी न।*
नाही होइ जाई फिनि ररिया 
 *रहिया जोहत बानी न।*

धुपवा-दिपवा से महकइ,
 तोहरा दरबार हो ,
अपने भक्तन के बनिजा,
 फिनि तारनहार हो ,
हरि लेतू दुनिया भर से,
 तू सगरी अन्हियरिया ,
 *रहिया जोहत बानी न।*
फइले कब जग में उजियरिया 
 *रहिया जोहत बानी न।*

मंदिर मा घंटा बाजइ,
गूंजत हौ आरती,
तोहरा बोलावत हउवें,
माई मां भारती ,
षड्यंत्र फाने बाएन,
 सगरे भ्रष्टाचरिया ,
 *रहिया जोहत बानी न।*
जेकरे काटे नाहिं लहरिया 
 *रहिया जोहत बानी न।*

हे अंबे मइया हमरी,
 मनसा पुरावा हो ,
जल्दी से आवा, नाहीं,
 देरिया लगावा हो, 
नाहीं कुछु होइ ना जाई,
 लागे हमके डरिया, 
 *रहिया जोहत बानी न।*
शेरवा कइ अब करा सवरिया 
 *रहिया जोहत बानी न।*

* रचनाकार-सुरेश मिश्र

( वरिष्ठ कवि एवं मंच संचालक ) - मुंबई