'बॉम्बे हाईकोर्ट’ का नाम बदलकर ‘महाराष्ट्र उच्च न्यायालय’ किया जाए, पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी का विधि व न्याय मंत्री को पत्र

'बॉम्बे हाईकोर्ट’ का नाम बदलकर ‘महाराष्ट्र उच्च न्यायालय’ किया जाए, पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी का विधि व न्याय मंत्री को पत्र

'बॉम्बे हाईकोर्ट’ का नाम बदलकर ‘महाराष्ट्र उच्च न्यायालय’ किया जाए, पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी का विधि व न्याय मंत्री को पत्र

- 7 दिसम्बर 2022 को संसद के शीतकालीन सत्र में जनसेवक शेट्टी ने सभापति महोदय के समक्ष सर्वप्रथम प्रस्तुत किया था प्रस्ताव 

* विशेष संवाददाता

   बोरीवली : उत्तर मुंबई के पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी ने केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल को विस्तार से पत्र लिखकर अपनी मांग दोहराई है कि 'बॉम्बे हाईकोर्ट’ का नाम बदलकर ‘महाराष्ट्र उच्च न्यायालय’ किया जाए। 
  जनसेवक गोपाल शेट्टी ने इससे पूर्व 08-10-2024 तथा 3-2-2025 को लिखे पत्रों का हवाला देते हुए पत्र में लिखा है कि उत्तर मुंबई के सांसद के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान मैंने 7 दिसंबर 2022 को संसद के शीतकालीन अधिवेशन में नियम 377 के अंतर्गत ‘बॉम्बे हाईकोर्ट’ का नाम बदलकर ‘महाराष्ट्र उच्च न्यायालय’ करने का प्रस्ताव लोकसभा के सभापति महोदय के समक्ष प्रस्तुत किया था। भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा 21 जून 2017 तथा 16 मार्च 2016 को जारी पत्रों में यह स्पष्ट किया गया है कि मुंबई, कोलकाता एवं मद्रास उच्च न्यायालयों के नाम परिवर्तन का विषय केंद्र सरकार के विचाराधीन है तथा राज्य सरकारों एवं संबंधित उच्च न्यायालयों से प्राप्त अभिमतों के आधार पर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
    जनसेवक शेट्टी द्वारा लिखे गए पत्र में आगे उल्लेख किया गया है कि ये विषय केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जन-भावनाओं से जुड़ा हुआ प्रश्न है। स्वतंत्र भारत की न्यायपालिका का नाम वसाहतकालीन पहचान से मुक्त होना आज समय की मांग है।
नीचे प्रस्तुत कारणों के आधार पर यह परिवर्तन न्यायसंगत, आवश्यक और पूर्णतः उपयुक्त प्रतीत होता है।
1. “Bombay High Court” नाम ब्रिटिश शासनकाल का अवशेष है, जिसे आधुनिक भारत में बनाए रखना उचित नहीं। भारत की न्यायिक संस्थाओं का नाम स्वाभिमान और सांस्कृतिक स्वतंत्रता का प्रतीक होना चाहिए।
2. राज्य पुनर्गठन (1960) के बाद ‘Bombay’ नाम का औचित्य समाप्त : 1960 में महाराष्ट्र राज्य की स्थापना के बाद “Bombay” केवल एक शहर का नाम रह गया है। संपूर्ण राज्य के सर्वोच्च न्यायालय का नाम भौगोलिक वास्तविकता के अनुरूप होना आवश्यक है।
3. महाराष्ट्र की आधिकारिक भाषा ‘मराठी’ के अनुरूप नामकरण : राज्य की भाषाई नीति और सांस्कृतिक अस्मिता को ध्यान में रखते हुए न्यायालय का नाम मराठी पहचान से मेल खाना चाहिए। मराठी भाषा महाराष्ट्र की आत्मा है, इसलिए न्यायालय का नाम भी सुसंगत होना आवश्यक है।

4. अन्य उच्च न्यायालयों के अनुरूप नाम की एकरूपता : देश के अधिकांश उच्च न्यायालय राज्यों के नाम से संबद्ध हैं। एकरूपता न्यायिक व्यवस्था में स्पष्टता एवं राष्ट्रीय स्तर पर सुसंगतता सुनिश्चित करती है।
5. प्रशासनिक स्पष्टता एवं दस्तावेज़ी एकरूपता : नाम परिवर्तन से सरकारी अभिलेखों, न्यायिक दस्तावेज़ों और प्रशासनिक प्रक्रिया में एकरूपता स्थापित होगी। 
6. राष्ट्रव्यापी नाम-परिवर्तन नीति के अनुरूप कदम : केंद्र सरकार द्वारा विगत वर्षों में अनेक संस्थानों, स्थानों और भवनों के वसाहतकालीन नामों को परिवर्तित किया गया है। इसी भावना के अनुरूप यह परिवर्तन भी आवश्यक एवं स्वाभाविक है।
7. महाराष्ट्र की जनता की दीर्घकालीन और न्यायपूर्ण मांग : कई वर्षों से नागरिक संगठन, विधिवेत्ता, भाषा-संरक्षण समूह और जनप्रतिनिधि भी इस परिवर्तन की मांग करते आए हैं। 
    पत्र के अंत मे जनसेवक शेट्टी ने उल्लेख किया है कि
उपरोक्त कारणों एवं आगामी शीतकालीन अधिवेशन (1 दिसंबर 2025) की महत्ता को ध्यान में रखते हुए आपसे विशेष अनुरोध है कि सरकार की ओर से इस प्रस्ताव को विधिवत रूप से सदन में प्रस्तुत कर इसकी विधि प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से आगे बढ़ाया जाए।
   बता दें कि जनसेवक शेट्टी ने केंद्रीय मंत्री तथा सांसद पीयूष गोयल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को भी उन्हें पहले लिखे पत्रों का हवाला देते हुए एक बार फिर पत्र भेजकर इस विषय में प्रभावी ढंग से कदम उठाकर नामांतरण की अपील की है।