सावन विशेष कजरी - काम भइल दून पिया न
सावन विशेष कजरी - काम भइल दून पिया न
****************
जल्दी घरवा आवा,आइ मानसून पिया,
*काम भइल दून पिया न।*
चुवइ लाग फिनि ओसार,
गड़हा होइ गइल दुवार,
*नेट* न वर्क करइ -
लागे नाहीं फून पिया,
*काम भइल दून पिया न।*
पूंछे रात मा सेजरिया,
कहिया अइहैं हो सांवरिया,
राह देखि-देखि -
बीति गइल जून पिया,
*काम भइल दून पिया न।*
ठप्प परल बा किसानी,
बोला, कइसे मनवां मानी,
जब से गउवां -
बनल बाटइ देहरादून पिया,
*काम भइल दून पिया न।*
जेकरा सइयां जी हौं गउवां,
ऊ दबावइ रोज पउवां,
रउवा हमरा लागे -
जिनगी सून-सून पिया,
*काम भइल दून पिया न।*
कागा आवइ न अटरिया,
जोही रात दिन डगरिया,
कलुआ खुद क समुझे-
आजु अफलातून पिया,
*काम भइल दून पिया न।*
खाली-खाली जिंदगानी,
पानी-पानी भइ जवानी,
अइसे लागइ जइसे -
दालि बिना नून पिया,
*काम भइल दून पिया न।*
बरसे पानी झकाझोर,
मन मयूर नाचे मोर,
कब मनावल जाई-
आपन हनीमून पिया,
*काम भइल दून पिया न।*
* रचनाकार : सुरेश मिश्र (वरिष्ठ कवि एवं मंच संचालक) - मुंबई
