कजरी : रिमझिम-रिमझिम बरसइ पनियां , देहिया लगल अगिनियां न

कजरी : रिमझिम-रिमझिम बरसइ पनियां , देहिया लगल अगिनियां न

कजरी : रिमझिम- रिमझिम बरसइ पनियां,
देहिया लगल अगिनियां न
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-मानसून अपने शबाब पर है। प्रियतम परदेश में हैं। नया नया गौना आया था कि पिया परदेश चले गए। उसने पिया को फोन किया- 

रिमझिम रिमझिम बरसइ पनियां 
 *देहिया लगल अगिनियां न।*

टप-टप नैन ओसारा टपके,
दिल आंगन भरि-भरि के छलके,
धनिया पिसत अहइ जस धनियां,
 *देहिया लगल अगिनियां न।*

सगरी रतिया नींद न आवइ,
चुहचुइया रहि-रहि डेरवावइ,
रूठल बाटइ मोर परनियां,
 *देहिया लगल अगिनियां न।*

चारिउ ओरी बा हरियाली,
हमरी खेतिया बाटइ खाली,
साजन बिनु के करइ किसनियां 
 *देहिया लगल अगिनियां न।*

केकरा करबइ पिया चिरौरी,
जियरा जरत अहइ जस भउरी,
तरसे कब ले मोर जवनियां,
 *देहिया लगल अगिनियां न।*

इक तउ टांगल मोर परनवां 
दुसरे सेजिया मारइ तनवां,
तिसरे चूमइ अधर नथनियां,
 *देहिया लगल अगिनियां न।*

सावन लागल परल झुलनवां,
इत-उत झूलइ हमरा मनवां,
अब तउ छोड़ा सजन नदनियां 
 *देहिया लगल अगिनियां न।*

* रचनाकार : सुरेश मिश्र
 (वरिष्ठ कवि एवं मंच संचालक)                मुंबई